हल्दी में कीट प्रबंधन के प्रभावी उपाय जानें। प्रमुख कीटों की पहचान, नियंत्रण के तरीके और स्वस्थ फसल के लिए उपयोगी प्रबंधन तकनीकें समझें।

लेखक परिचय

  • लेखक का नाम: डॉ. विजय लक्ष्मी राय
  • पाठ्यक्रम: सहायक प्राध्यापक
  • महाविद्यालय: कृषि महाविद्यालय, कोटवा, आजमगढ़, आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, अयोध्या (उ.प्र.)
  • लेख आईडी: AP-V01-I04-03
  • लेखक का ईमेल: vijaylaxmi31981@gmail.com
  • सह-लेखकों के नाम:
    आकांक्षा तिवारी, विनीत प्रताप सिंह, प्रकाश यादव, विमलेश कुमार

लेख का शीर्षक: हल्दी में कीट प्रबंधन: स्वस्थ फसल, बेहतर उत्पादन

सारांश

हल्दी (Curcuma longa L.) जिंजीबेरेसी (Zingiberaceae) कुल तथा जिंजीबरेलीज (Zingiberales) गण की एक महत्वपूर्ण मसाला, औषधीय एवं औद्योगिक फसल है। भारत को प्रायः “मसालों का कटोरा” कहा जाता है और देश के विभिन्न भागों में अनेक प्रकार के मसालों की खेती की जाती है। मसाले पौधों के विभिन्न भागों, जैसे कलियाँ, छाल, जड़, फूल, फल एवं प्रकंद आदि से प्राप्त होते हैं। इन्हीं महत्वपूर्ण मसाला फसलों में हल्दी का विशेष स्थान है। हल्दी के प्रकंद का उपयोग भोजन में मसाले एवं प्राकृतिक रंग के रूप में किया जाता है। इसका स्वाद विशिष्ट, गर्म तथा कुछ कड़वा होता है। हल्दी का औषधीय उपयोग भी प्राचीन काल से होता आया है। इसमें पाया जाने वाला करक्यूमिन (Curcumin) प्रमुख पीला रंगद्रव्य है,

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